Aramaan – Kavita by Dr .Sheshdhar Tripathi

Aramaan – Kavita by Dr .Sheshdhar Tripathi

अरमान लिए कारी बदरी Aramaan – Kavita by Dr .Sheshdhar Tripathi

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अरमान लिए कारी बदरी

अरमान लिए कारी बदरी,
बरसी भी नहीं, सकुची सी रही।
तरस रही अपने बदरा को,
पुरवा की राह निरख सी रही।।

भरी हुई थी गम में अपने,
दामिनि संग वो गरज रही।
भड़ास निकाले अंदर से,
दामन से अपने कौंध रही।।

भय से बदरा आये नहीं,
अंतर में तृष्णा भरी रही।
झोंका पवन का उड़ा रहा है,
चक्षु-प्यास की बनी रही।।

श्यामल गात सुघड़ सलोना,
बदली काली निखर रही।
बदरा से मिलने को आतुर,
दुःख वियोग में बिखर रही।।

कहाँ गया मेघा मन मेरा,
कब आये मग निरख रही।
क्या वो भी क्षुभित हुआ होगा,
बदरा बिन जितना तड़प रही।।

निष्ठुर पवन झकोरा आया,
विकल वियोगिनी देख रही।
अपने प्रिय मेघा से मिलकर,
लिपट, सिमट वो शून्य हो रही।।

नीर भरे बादल संग भागी,
कारी बदरी झूम रही।
तप्त धरा की तृषा बुझी,
अब धानी चूनर ओढ़ रही।।

Aramaan – Kavita by Dr .Sheshdhar Tripathi

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डॉ. शेषधर त्रिपाठी

पुणे, महाराष्ट्र।

Updated: August 19, 2019 — 12:02 pm

1 Comment

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  1. जब भी कोई शख्स पॉलिसी का नाम लेता है तो हमारे जहन में जो सबसे पहला नाम आता है वो है LIC . ऐसा इसलिए क्योंकि LIC देश की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी कंपनी है. जीवन बीमा लेने के मामले में LIC सबसे विश्वसनीय कंपनी है. शायद इसलिए ही LIC के पॉलि‍सी होल्‍डर्स की संख्‍या लाखों में है.

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